शिविर में बच्चों ने रचनात्मक गतिविधियों के साथ भारतीय संस्कारों का लिया पाठ
देहरादून। श्री सत्य साईं सेवा संगठन, उत्तराखंड द्वारा दुर्गा मंदिर, गढ़ी कैंट में आयोजित दो दिवसीय निःशुल्क समर कैंप का मंगलवार को उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हो गया। बच्चों में मानवीय मूल्यों, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के विकास के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में लगभग 50 से 60 बच्चों ने उत्साह, अनुशासन और समर्पण के साथ भाग लिया। शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा जैसे सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का संवर्धन करना था। दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में बच्चों को योग, ध्यान, भजन, वैदिक मंत्रोच्चारण, संगीत, नृत्य, कला एवं शिल्प, गाइडेड मेडिटेशन तथा विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा गया। खेलों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से अनुशासन, सेवा, करुणा, सहयोग और सकारात्मक सोच का महत्व समझाया गया।
राज्य संयुक्त आध्यात्मिक समन्वयक बीना जोशी ने भजन, मंत्रोच्चारण, योग एवं आध्यात्मिक अभ्यासों का संचालन किया। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि बचपन में विकसित संस्कार और चरित्र व्यक्ति के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने बताया कि नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा बच्चों को जिम्मेदार नागरिक और समाज के आदर्श सदस्य बनने में सहायता करती है। उन्होंने श्री सत्य साईं बाल विकास कार्यक्रम को चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सेवा भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया। समापन समारोह में राज्य अध्यक्ष कर्नल योगेंद्र सिंह अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। उनका संदेश राज्य उपाध्यक्ष अजय स्वरूप ने बच्चों और अभिभावकों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में अपनाना आवश्यक है। उनके अनुसार दया, ईमानदारी, सहानुभूति, प्रेम और सहयोग स्वस्थ एवं शांतिपूर्ण समाज की आधारशिला हैं।
उन्होंने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का भी आह्वान किया। वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने ‘पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ’, ‘जल ही जीवन है’ और ‘प्लास्टिक मुक्त धरती हमारा सामूहिक संकल्प हो’ जैसे संदेश दिए। साथ ही सभी जीवों के प्रति करुणा रखने, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने तथा मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों को भी संबोधित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और सकारात्मक एवं संस्कारयुक्त पारिवारिक वातावरण उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखता है। अभिभावकों को बच्चों को सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया गया।
शिविर में अंशिका रावत ने बच्चों को नृत्य एवं गायन का प्रशिक्षण दिया। उनकी प्रेरणादायी शिक्षण शैली और रोचक सत्रों ने बच्चों को विशेष रूप से आकर्षित किया। बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संगठन द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चों को पर्यावरण अनुकूल कपड़े के थैले वितरित किए गए। बच्चों ने प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने की शपथ भी ली। राज्य युवा समन्वयक चित्रा चांदना ने बच्चों को उच्च आदर्शों, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ विचार और अच्छा आचरण ही उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कुंजी हैं।
शिविर के समापन पर बच्चों ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की। राज्य उपाध्यक्ष अजय स्वरूप ने सभी प्रतिभागियों, अभिभावकों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस अवसर पर चंद बल्लभ, वी.पी. डबराल, दिनेश पाल, नीरज थापा, सुनील कंवर, राजीव दुबे, रीता पंत, किरण अहलूवालिया, प्रभा डबराल, राधा वल्लभ, सपना थापा, सोनिया धीर, मीना छेत्री, प्रीति जोशी, अनीता पाल, जय गुरूंग, कुसुम शर्मा, सुमन कंवर, संध्या राय, संविता राय, देवी लामा, दुर्गा गुरूंग, गौरी छेत्री, कमला थापा, कल्पना वर्मा, पूजा खड़का, अंजू राणा, मंजू थापा, सुधा पून सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में अभिभावकों और बच्चों की सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
