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आग की लपटों के बीच दून पुलिस का साहसिक रेस्क्यू, ICU मरीजों की बचाई जान

देहरादून। नेहरू कॉलोनी क्षेत्र स्थित रिस्पना पुल के पास एक निजी अस्पताल में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल के आईसीयू में एसी ब्लास्ट होने के बाद लगी आग और धुएं के बीच दून पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर मानवता की मिसाल पेश की। इस दौरान कई पुलिसकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर राहत एवं बचाव कार्य किया।

पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिलने पर थाना नेहरू कॉलोनी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। जानकारी के अनुसार पेनिसिया अस्पताल के आईसीयू में लगे एसी में ब्लास्ट होने से आग लगी, जिसके बाद पूरे आईसीयू में धुआं और गैस फैल गई। स्थिति गंभीर देखते हुए पुलिस टीम बिना अपनी जान की परवाह किए आईसीयू में दाखिल हुई और वहां भर्ती मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल से बाहर पहुंचाया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान धुएं और गैस के कारण कुछ मरीजों तथा पुलिसकर्मियों को ऑक्सीजन की कमी की शिकायत हुई, जिन्हें उपचार के लिए कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान आईसीयू में पहले से वेंटिलेटर पर भर्ती 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला वीरवती पत्नी अमरनाथ निवासी कांवली, बल्लीवाला, देहरादून की मृत्यु हो गई।

घटना में कुल 10 लोग घायल हुए हैं, जबकि राहत एवं बचाव कार्य में लगे तीन पुलिसकर्मियों की भी तबीयत बिगड़ गई। घायलों में राहुल कुमार, मुकेश, शंभू दास, गोरी, दौलत सिंह, बेबी उर्फ पायल, संगीता देवी, खान बहादुर, नित्यानंद तथा निहाल शामिल हैं। निहाल को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी देहरादून तथा एसपी सिटी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद एसएसपी ने कैलाश अस्पताल पहुंचकर भर्ती पुलिसकर्मियों और मरीजों का हालचाल जाना तथा चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।

इस साहसिक रेस्क्यू अभियान में थाना नेहरू कॉलोनी प्रभारी निरीक्षक मनोज नौटियाल, उपनिरीक्षक धनीराम पुरोहित, उपनिरीक्षक गिरीश बडोनी, उपनिरीक्षक अमित रॉड, एएसआई अंशुल बर्थवाल, एएसआई नरेंद्र कुमार, कांस्टेबल कमलेश सजवाण, बृजमोहन रावत, बृजमोहन कनवासी, संदीप छाबड़ी, हेड कांस्टेबल राजमोहन खत्री और कांस्टेबल विपिन सेमवाल समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दून पुलिस की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी के चलते कई मरीजों की जान बचाई जा सकी।

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