फिल्म ‘सूर्या’ में चिकित्सकों की छवि को लेकर आईएमए देहरादून ने जताई नाराजगी
देहरादून। फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ में चिकित्सा पेशे के कथित नकारात्मक चित्रण को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), देहरादून ने आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि भ्रष्टाचार और अनैतिक चिकित्सा प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन कुछ व्यक्तियों के गलत आचरण के आधार पर पूरे चिकित्सक समुदाय को लालची, कमीशनखोर और मरीजों का शोषण करने वाला दिखाना उचित नहीं है। इससे चिकित्सकों के प्रति अविश्वास बढ़ने के साथ मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास का रिश्ता भी प्रभावित हो सकता है।
आईएमए के अनुसार, फिल्म के एक दृश्य में एक पिता अपनी बेटी के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचता है और डॉक्टर पर भरोसा करता है। बाद में उसे अतिरिक्त जांच, पांच लाख रुपये के बिल और कथित कमीशनखोरी जैसी परिस्थितियों का सामना करते हुए दिखाया गया है। एसोसिएशन ने कहा कि यदि चिकित्सा सेवाओं में इस तरह की अनियमितताएं होती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, किसी एक व्यक्ति के कृत्य के लिए पूरे पेशे को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
मरीज-चिकित्सक संबंधों में विश्वास बनाए रखना जरूरी
आईएमए देहरादून ने स्पष्ट किया कि वह चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार, अनावश्यक जांच और मरीजों के आर्थिक शोषण जैसी कथित अनैतिक गतिविधियों के विरुद्ध है। संगठन का मानना है कि चिकित्सा पेशे की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए दोषी चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ईमानदारी से सेवाएं दे रहे चिकित्सकों की छवि को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने कहा कि सिनेमा समाज की सोच और जनमानस पर गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील विषयों को प्रस्तुत करते समय तथ्यों, संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए। चिकित्सकों के खिलाफ गाली-गलौज, धमकी, अस्पतालों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं चिंताजनक हैं। पूरे चिकित्सक समुदाय की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने से ऐसी परिस्थितियां और गंभीर हो सकती हैं।
केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर समीक्षा की मांग
आईएमए देहरादून ने इस मामले में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की तत्काल निष्पक्ष समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर उचित कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने फिल्म निर्माता, कलाकारों और मीडिया से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विषयों को जिम्मेदारी तथा तथ्यात्मक संतुलन के साथ प्रस्तुत करने की अपील की है।
वहीं, फिल्म के निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि फिल्म का उद्देश्य डॉक्टरों, नर्सों या अस्पतालों को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर होने वाली कथित अनैतिक गतिविधियों और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना है। आईएमए देहरादून ने अपने संदेश में कहा, “गलत डॉक्टर का विरोध कीजिए, लेकिन हर डॉक्टर को गलत मत कहिए। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाइए, लेकिन पूरे चिकित्सक समुदाय की छवि को धूमिल मत कीजिए।” इस अवसर पर आईएमए के डॉ. महेश कुडियाल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

