हरिद्वार में चंद्रशेखर आजाद के काफिले को पुलिस ने रोका, संघर्ष जारी रखने का संकल्प
टिहरी: जिले के लंबगांव थाना क्षेत्र के देवल गांव में दलित युवक केतन लाल की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे भीम आर्मी प्रमुख एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को रविवार को हरिद्वार में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी।
हरिद्वार में मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शोकाकुल परिवार से मिलकर उनका दुःख साझा करना और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की मांग उठाना है। आजाद ने कहा कि यदि उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई तो वह संविधान और कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से पैदल मार्च करते हुए पीड़ित परिवार तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि इसके बाद भी उन्हें रोका गया तो वह लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने संकल्प से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सांसद ने अपने समर्थकों से भी हर परिस्थिति में शांति, संयम और कानून का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा।
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि टिहरी जिले के लंबगांव थाना क्षेत्र के देवल गांव में 7–8 जून 2026 की रात 18 वर्षीय दलित युवक केतन लाल की जातीय घृणा से प्रेरित निर्मम हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने जाते समय हरिद्वार में उत्तराखंड पुलिस द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सांसद को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना गंभीर विषय है और यदि जनप्रतिनिधियों को भी पीड़ितों के साथ खड़े होने से रोका जाएगा तो आम नागरिक को न्याय कैसे मिलेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, कथित रूप से जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने तथा केतन लाल हत्याकांड के सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी कर उन्हें कठोरतम सजा दिलाने की मांग की।
