विश्व पर्यावरण दिवस पर नेस्ले इंडिया ने वेस्ट-फ्री (कचरा-मुक्त) भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
देहरादून। विश्व पर्यावरण दिवस पर, नेस्ले इंडिया ने ज़िम्मेदार पैकेजिंग, प्लास्टिक इकट्ठा करने और उसकी प्रोसेसिंग, और समुदाय के नेतृत्व वाले कचरा प्रबंधन प्रयासों के ज़रिए प्लास्टिक कचरे को कम करने के अपने संकल्प को दोहराया। कंपनी ने देश भर में सर्कुलर इकोनॉमी समाधानों को मज़बूत करने और कचरा प्रबंधन के ज़िम्मेदार तरीकों को बढ़ावा देने पर भी अपना ध्यान फिर से ज़ाहिर किया।
नेस्ले इंडिया में कॉर्पोरेट अफेयर्स, सस्टेनेबिलिटी और सीएसआर के हेड, कुंवर हिम्मत सिंह ने कहा, “प्लास्टिक कचरे की समस्या से निपटने के लिए हर स्तर पर कदम उठाने की ज़रूरत है – पैकेजिंग के डिज़ाइन से लेकर इस्तेमाल के बाद उसे इकट्ठा करने और मैनेज करने तक। हमें अपनी अब तक की प्रगति पर गर्व है, लेकिन हम जानते हैं कि अभी और भी बहुत कुछ करना बाकी है, और हम इस समस्या के समाधान का हिस्सा बने रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
नेस्ले इंडिया का मानना है कि पैकेजिंग पर्यावरण में नहीं मिलनी चाहिए। कंपनी बाजार में जितनी प्लास्टिक पैकेजिंग लाती है, उतनी ही मात्रा में उसे इकट्ठा और प्रोसेस करती है। वित्त वर्ष 2025-26 में, इसका मतलब था कि रीसाइक्लिंग और रिकवरी के अन्य स्वीकृत तरीकों से लगभग 25,000 मीट्रिक टन प्लास्टिक पैकेजिंग का जिम्मेदारी से प्रबंधन किया गया। कंपनी 2020 से प्लास्टिक न्यूट्रल बनी हुई है और प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए सिस्टम को मजबूत करना जारी रखे हुए है।
प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की शुरुआत इसके कम इस्तेमाल से होती है। नेस्ले इंडिया अपनी पैकेजिंग को फिर से डिज़ाइन कर रही है ताकि कम मटीरियल और ज़्यादा रीसाइकल किए गए मटीरियल का इस्तेमाल हो सके। कम प्लास्टिक वाले कॉफ़ी पाउच और मैगी कप्पा के लिए थर्मोफॉर्म्ड कप के लगातार इस्तेमाल से लेकर कॉफ़ी, केचप, चॉकलेट और कन्फेक्शनरी की पैकेजिंग में रीसाइकल किए गए प्लास्टिक के ज़्यादा इस्तेमाल तक, हर सुधार वर्जिन प्लास्टिक की ज़रूरत को कम करने में मदद करता है।
नेस्ले इंडिया, ‘प्लान फाउंडेशन’ के साथ मिलकर ‘प्रोजेक्ट हिलदारी’ के ज़रिए कचरा प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के लिए समुदायों के साथ काम कर रही है। यह पहल अभी भारत के 10 पर्यटन स्थलों पर चल रही है, जिनमें हाल ही में शामिल किए गए शिमला और थियोग भी शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, ‘प्रोजेक्ट हिलदारी’ ने कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने (सोर्स सेग्रीगेशन) को बढ़ावा देने के लिए 1,30,000 से ज़्यादा परिवारों को शामिल किया।
इससे प्रोजेक्ट वाली जगहों पर 78 प्रतिशत कचरा अलग-अलग करने का लक्ष्य हासिल हुआ और 13,000 मीट्रिक टन से ज़्यादा कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका गया। इस प्रोजेक्ट के तहत 1,500 से ज़्यादा कचरा कर्मियों के लिए 250 से ज़्यादा ट्रेनिंग सेशन भी आयोजित किए गए, जिससे काम करने के सुरक्षित तरीकों को बढ़ावा मिला और स्थानीय कचरा प्रबंधन सिस्टम मज़बूत हुआ।
इन प्रयासों के ज़रिए, नेस्ले इंडिया देश भर में साफ़-सुथरा और ज़्यादा टिकाऊ माहौल बनाने तथा ज़िम्मेदार कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए पार्टनर्स, समुदायों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करना जारी रखे हुए है।
