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संयुक्त सचिव ने किया गलोगी हाइड्रो प्रोजेक्ट का निरीक्षण, कार्यों की समीक्षा

देहरादून: भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विंड) राजेश कुलहारी ने आज यूजेवीएन लिमिटेड की ऐतिहासिक गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना के संचालन, रखरखाव एवं उत्पादन क्षमता का विस्तृत अवलोकन किया तथा अधिकारियों से विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के अवसर पर यूजेवीएन लिमिटेड के महाप्रबंधक अजय पटेल, उपमहाप्रबंधक अजय सिंह, कृष्ण कुमार सिंह बिष्ट, अधिशासी अभियंता राकेश सिंह नेगी एवं महावीर सिंह पंवार, सहायक अभियंता मनीषा कौंसवाल रतूड़ी, अवर अभियंता ललिता बुड़ाकोटी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

संयुक्त सचिव राजेश कुलहारी ने लगभग 119 वर्ष पुरानी इस लघु जलविद्युत परियोजना के कुशल, सुरक्षित एवं पूर्ण दक्षता के साथ संचालन पर विशेष संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतनी पुरानी परियोजना का आधुनिक मानकों के अनुरूप सफल संचालन अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने परियोजना में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह टीमवर्क और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि गलोगी विद्युत गृह ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 81 लाख यूनिट ऊर्जा का उत्पादन किया है, जो पिछले 54 वर्षों में सर्वाधिक है। यह उत्पादन परियोजना के प्रारंभ से अब तक का दूसरा सर्वोच्च स्तर भी है, जो इसकी कार्यक्षमता और बेहतर प्रबंधन को दर्शाता है।

इस अवसर पर यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि निगम न केवल नई परियोजनाओं के विकास पर कार्य कर रहा है, बल्कि पुरानी एवं ऐतिहासिक परियोजनाओं को आधुनिक तकनीक के साथ संचालित कर उनकी उपयोगिता को बनाए रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आगे कहा कि गलोगी परियोजना राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन का स्रोत है, बल्कि प्रदेश की समृद्ध इंजीनियरिंग विरासत का भी प्रतीक है।

यूजेवीएन लिमिटेड द्वारा इस प्रकार की परियोजनाओं के संरक्षण एवं आधुनिकीकरण के माध्यम से उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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