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वन भूमि हस्तांतरण के लंबित प्रकरणों की जिलाधिकारी ने की समीक्षा

टिहरी गढ़वाल: जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में आज वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन भूमि हस्तांतरण के लंबित 10 प्रकरणों पर चर्चा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित अधिकारी क्षतिपूरक वृक्षारोपण एवं वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित SOP का भली-भांति अध्ययन कर उसके अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए लैंड पार्सल से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर उसका GIS एक्सपर्ट द्वारा उसी दिन परीक्षण किया जाए। इसके बाद अधिकतम तीन दिनों के भीतर संबंधित प्रभारी वनाधिकारी को भूमि की उपयुक्तता के संबंध में अवगत कराया जाए, ताकि एक सप्ताह के भीतर वन भूमि हस्तांतरण की आवश्यक कार्यवाही पूर्ण की जा सके।

बैठक में राज्य योजना के अंतर्गत टिहरी विधानसभा क्षेत्र में नैर से पुजाल्डी तक मोटर मार्ग निर्माण के संबंध में अवगत कराया गया कि उपजिलाधिकारी धनोल्टी स्तर से भूमि चयन के उपरांत ग्राम घनसी, तहसील नैनबाग की भूमि संबंधी प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाना अपेक्षित है। प्रतापनगर क्षेत्र में तेलुंगा तक सड़क निर्माण के संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा ग्राम सांदणा, उप तहसील मदननेगी की भूमि को क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु उपयुक्त पाया गया है।

इस प्रकरण में संबंधित प्रस्ताव उपजिलाधिकारी प्रतापनगर के स्तर से उपलब्ध कराया जाना अपेक्षित है। इसी प्रकार प्रतापनगर क्षेत्र में रैंका महरगांव से मुखेम मोटर मार्ग के संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी को तहसील जाखणीधार के अंतर्गत ग्राम गौसारी आदि के कुल तीन लैंड पार्सल क्षतिपूरक वृक्षारोपण हेतु प्राप्त हुए हैं। इस संबंध में वन विभाग के स्तर से रिपोर्ट प्राप्त किया जाना अपेक्षित है।

इसी प्रकार नीम बीच के पास वन भूमि हस्तांतरण के संबंध में उपजिलाधिकारी कीर्तिनगर को पत्र प्रेषित किया जा चुका है। वहीं धनोल्टी क्षेत्र में मसोन, कांडी, द्वारगढ़ पर जयद्वार-सुरांचु तक मोटर मार्ग निर्माण हेतु भूमि चयन के लिए कुल 27 लैंड पार्सल की सूची प्रेषित की गई है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए लंबित प्रकरणों में आवश्यक प्रस्ताव, रिपोर्ट एवं भूमि चयन की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी की जा सके।

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