राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राहुल गांधी पर बरसे कर्नल अजय कोठियाल, बोले— सेना का सम्मान सर्वोपरि
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के महानगर कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित कर्नल अजय कोठियाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस मामले में अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। प्रेस वार्ता में उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना के सम्मान और कांग्रेस की ऐतिहासिक नीतियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी सवाल उठाए। कर्नल कोठियाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सेना, सुरक्षा संस्थानों और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तियों के प्रति भाषा की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित किसी भी राजनीतिक दल के हितों से ऊपर होने चाहिए।
नेहरू काल की विदेश नीति पर उठाए सवाल
कर्नल कोठियाल ने जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल, तिब्बत के प्रश्न और वर्ष 1954 के पंचशील समझौते का उल्लेख करते हुए तत्कालीन विदेश नीति की समीक्षा की आवश्यकता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के साथ संबंधों को लेकर अपनाई गई नीतियों के दीर्घकालीन सामरिक परिणामों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 का भारत-चीन युद्ध देश के इतिहास का महत्वपूर्ण और दुखद अध्याय है। इस युद्ध के संदर्भ में तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व, सैन्य निर्णयों, सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद और सैनिकों को उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। कर्नल कोठियाल ने युद्ध से संबंधित प्रकाशित साहित्य और हेंडरसन ब्रूक्स–भगत रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि 1962 की परिस्थितियों और उससे जुड़े निर्णयों को समझना आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट के शौर्य को किया नमन
प्रेस वार्ता के दौरान कर्नल कोठियाल ने वर्ष 1962 के युद्ध में भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को याद किया। उन्होंने रेजांग ला के युद्ध में 13 कुमाऊं के जवानों की वीरता और परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर शैतान सिंह के बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने नूरानांग क्षेत्र में 4 गढ़वाल राइफल्स की भूमिका और महावीर चक्र से सम्मानित राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के शौर्य को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा देश के लिए गौरव का विषय है और सैनिकों के सम्मान तथा उनके बलिदान को याद रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
इंदिरा गांधी के कार्यकाल और आपातकाल का किया उल्लेख
कर्नल कोठियाल ने इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़ी विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से जवाबदेही के सवाल उठाए। उन्होंने वर्ष 1966 में मिजोरम के आइजोल में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई, उसी वर्ष दिल्ली में गौ-रक्षा आंदोलन के दौरान हुई पुलिस गोलीबारी तथा वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐतिहासिक निर्णयों का मूल्यांकन तथ्यों और उनके परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्ष 1984 में स्वर्ण मंदिर में हुए सैन्य अभियान का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण पर भी टिप्पणी
कर्नल कोठियाल ने राहुल गांधी के पूर्व राजनीतिक व्यवहार और सार्वजनिक बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर जिम्मेदार आचरण आवश्यक है। उन्होंने वर्ष 2013 में अध्यादेश की प्रति फाड़ने की घटना और वर्ष 2018 में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गले मिलने के बाद राहुल गांधी के व्यवहार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अजीत डोभाल पर कथित टिप्पणी को लेकर जताई आपत्ति
कर्नल कोठियाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत से संबंधित कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों पर आसीन व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन चर्चा तथ्यों और मर्यादा के साथ होनी चाहिए।
उन्होंने अजीत डोभाल के सुरक्षा एवं खुफिया क्षेत्र में लंबे अनुभव का उल्लेख करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट कार्रवाई, डोकलाम, गलवान और ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों को राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखा।
कर्नल कोठियाल के अनुसार, भारत की सुरक्षा नीति में रणनीतिक दृढ़ता, खुफिया तंत्र, सैन्य तैयारी और विभिन्न सुरक्षा संस्थानों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देने वाले अधिकारियों और संस्थानों के विषय में सार्वजनिक चर्चा करते समय जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।
कांग्रेस नेतृत्व से पूछे दो सवाल
कर्नल कोठियाल ने कांग्रेस नेतृत्व से दो प्रमुख सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि क्या कांग्रेस राहुल गांधी की अजीत डोभाल को लेकर की गई कथित टिप्पणी का समर्थन करती है और क्या पार्टी इस विषय पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पदों और व्यक्तियों पर दिए गए बयानों के व्यापक प्रभाव को राजनीतिक दलों को गंभीरता से समझना चाहिए। उनके अनुसार, इस विषय पर कांग्रेस की स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आनी चाहिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति नहीं, जिम्मेदारी जरूरी
प्रेस वार्ता के समापन पर कर्नल अजय कोठियाल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना का सम्मान और देश का हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने कांग्रेस के ऐतिहासिक निर्णयों और वर्तमान नेतृत्व के बयानों की समीक्षा की आवश्यकता बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक नेतृत्व को तथ्यों, जवाबदेही और जिम्मेदार भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के सैनिकों और नागरिकों की अपेक्षा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दल स्पष्ट और जिम्मेदार रुख अपनाएं। कर्नल कोठियाल ने कांग्रेस नेतृत्व से राहुल गांधी की कथित टिप्पणी पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग दोहराई।

