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4 जुलाई से एम-पैक्स पदाधिकारियों का राज्यस्तरीय प्रशिक्षण वर्ग, ‘बिना संस्कार नहीं सहकार’ रहेगा मूल मंत्र

देहरादून, 2 जुलाई। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर सहकार भारती, उत्तराखण्ड द्वारा 4 एवं 5 जुलाई 2026 को “लक्ष्मणराव इनामदार एम-पैक्स (MPACS) पदाधिकारी प्रशिक्षण वर्ग” का आयोजन माधव सिंह भण्डारी किसान भवन, अपर नथनपुर, देहरादून में किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखण्ड शासन के सहकारिता, कृषि, पशुपालन एवं वन विभाग के सहयोग से किया जा रहा है।

प्रशिक्षण वर्ग में गढ़वाल मंडल के सात जनपदों की 54 एम-पैक्स समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, निदेशक एवं अन्य पदाधिकारी भाग लेंगे। इनमें अधिकांश प्रतिभागी लघु एवं सीमान्त कृषक हैं, जो सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य एम-पैक्स के निर्वाचित पदाधिकारियों के नेतृत्व एवं प्रबंधकीय कौशल का विकास, सहकारी सुशासन को मजबूत करना तथा बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाना है। इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण समृद्धि को गति देने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

प्रशिक्षण वर्ग का मुख्य विषय “बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार” रहेगा। सहकार भारती का मानना है कि सहकारी संस्थाओं की सफलता केवल आर्थिक संसाधनों पर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता, ईमानदारी, सेवा-भाव, अनुशासन और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण पर आधारित होती है। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण में वैल्यू-बेस्ड लीडरशिप, सहकारिता के जीवन-मूल्य, सुशासन, संगठनात्मक अनुशासन और समाज सेवा जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।

4 जुलाई को सुबह 10 बजे प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन उत्तराखण्ड के सहकारिता एवं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत करेंगे। इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के समापन सत्र की अध्यक्षता वन, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल करेंगे।

5 जुलाई को आयोजित प्रशिक्षण सत्र की अध्यक्षता कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी करेंगे, जबकि समापन सत्र की अध्यक्षता पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा करेंगे।

सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़ ने बताया कि प्रशिक्षण वर्ग में सहकारिता के सिद्धांत, उत्तराखण्ड सहकारी अधिनियम, आदर्श उपविधियां, वित्तीय अनुशासन, नेतृत्व विकास, बहुउद्देशीय एम-पैक्स की अवधारणा तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा, स्वावलंबन और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने सहकारिता से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों से कार्यक्रम में सहभागिता कर सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया।

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