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ग्राफिक एरा में राष्ट्रीय संगोष्ठी, मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर हुआ मंथन

देहरादून। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष  कुसुम कंडवाल ने कहा कि कानून अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन मानवीय मूल्यों के बिना न्याय की परिकल्पना अधूरी है। मानवता और नैतिकता ही किसी भी समाज को सही दिशा देने वाले मूल आधार हैं। वह आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में मानवाधिकारों पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। कुसुम कंडवाल ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों, घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनी प्रावधानों और न्याय तक पहुंच से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला।

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राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य श्री एच. सी. सेमवाल ने मानवाधिकारों के संरक्षण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और न्याय सुनिश्चित करने में मानवाधिकारों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जनरल श्री वी.के. माहेश्वरी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का अनुभव और ज्ञान समाज की अमूल्य धरोहर है, इसलिए उनकी सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करना कानूनी व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने छात्रों को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी।

इस सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ लॉ ने किया। सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के एआई एंड एमर्जिंग टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर जनरल डा. अमित आर. भट्ट, कॉलेज ऑफ लॉ के हेड डा. अशुतोष हजेला के साथ डा. शैलजा ठाकुर, मनीष प्रताप सिंह, शान्तनु शेखर, अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

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