सालों से भटकते बुजुर्ग पहुंचे डीएम के पास, लौटते बोले – ‘आज सहारा मिल गया
देहरादून: कलेक्ट्रेट में लगने वाला जनदर्शन अब सिर्फ शिकायत मंच नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का केंद्र बनता जा रहा है। लोग कहते नजर आते हैं कि शायद देहरादून ने लंबे समय बाद ऐसा जिलाधिकारी देखा है, जो हर फरियादी की बात ध्यान से सुनता है और सही पाए जाने पर तुरंत अपनी कलम से इंसाफ लिख देता है।
सोमवार को आयोजित जनदर्शन में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब एक के बाद एक बुजुर्ग डीएम सविन बंसल के सामने पहुंचे और बोले – “साहब हमें इंसाफ दिला दो।” किसी की जमीन पर कब्जे का प्रयास था, कोई अपने ही घर से बेदखल था तो कोई बेटे-बहू के अत्याचार से परेशान था। डीएम ने हर फरियाद को गंभीरता से सुनते हुए मौके पर ही अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिए।
सबसे सख्त कार्रवाई उस समय देखने को मिली जब एचडीसी कॉलोनी में धंसी सीवर लाइन और टूटी सड़क की शिकायत सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जनदर्शन से गैरहाजिर अधिशासी अभियंता का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दे दिए। डीएम की इस कार्रवाई से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
जनदर्शन में पहुंचे कई बुजुर्ग माता-पिता ने संपत्ति विवाद, मारपीट और धमकियों की शिकायत की। डीएम ने ऐसे मामलों में भरण-पोषण अधिनियम और सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए, जबकि जमीन कब्जे के मामलों में तहसीलदार को मौके पर जांच के आदेश दिए।
एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा सुनकर डीएम ने तुरंत उसे सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था कराई, जबकि घायल बेटे के इलाज के लिए परेशान पिता की गुहार पर सीएमओ को आयुष्मान कार्ड की स्थिति तत्काल जांचने के निर्देश दिए।
मोहकमपुर और नेहरूग्राम की जर्जर सड़क, गंदगी और अतिक्रमण पर डीएम ने समय सीमा तय करते हुए रिपोर्ट तलब की, वहीं सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत पर भी जांच के आदेश जारी किए गए।
लोगों का कहना है कि डीएम सविन बंसल की कार्यशैली सबसे अलग है — वे सबकी सुनते जरूर हैं, लेकिन फैसला तथ्यों के आधार पर लेते हैं। उनकी फटकार ऐसी होती है कि अधिकारी भी लापरवाही करने से पहले सोचने लगते हैं।
कलेक्ट्रेट से बाहर निकलते हुए कई फरियादी कहते नजर आए कि “आज पहली बार लगा कि कोई अधिकारी हमारी बात सच में सुन रहा है।”
जनदर्शन अब एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम जनता के लिए इंसाफ की उम्मीद बनता जा रहा है — जहां लोग भरोसे के साथ पहुंचते हैं और राहत की उम्मीद लेकर लौटते हैं।
