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स्पिक मैके द्वारा उस्ताद कमाल साबरी की मंत्रमुग्ध कर देने वाली सारंगी प्रस्तुति

देहरादून,  स्पिक मैके उत्तराखण्ड चैप्टर द्वारा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सारंगी वादक उस्ताद कमाल साबरी की श्रृंखलाबद्ध शास्त्रीय संगीत प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। इन प्रस्तुतियों को एसआरएफ फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। इस संगीत श्रृंखला के अंतर्गत दून पुस्तकालय एवं अनुसंधान केंद्र, देव संस्कृति विश्वविद्यालय (हरिद्वार), स्पेशल होम (देहरादून), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, तथा डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट सहित विभिन्न स्थलों पर प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों, फैकल्टी एवं संगीत प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

प्रख्यात तबला वादक रजनीश मिश्रा की संगत में उस्ताद कमाल साबरी ने राग शुद्ध सारंग की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और शांति से अभिभूत कर दिया। एक विशिष्ट एवं ध्यानमय अनुभव प्रदान करते हुए उन्होंने श्रोताओं को नेत्र बंद कर अंतर्मन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए रागों और तालों की सूक्ष्मताओं पर प्रकाश डाला तथा प्रत्येक रचना के भावात्मक और आध्यात्मिक पक्ष को सरल भाषा में समझाया। उनकी प्रस्तुतियों का एक प्रमुख आकर्षण राग श्याम कल्याण रहा।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपने पिता एवं गुरु, महान उस्ताद साबरी ख़ान को समर्पित एक रचना भी प्रस्तुत की, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उस्ताद कमाल साबरी, मुरादाबाद घराने की सातवीं पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं और अपनी अभिव्यक्तिपूर्ण शैली तथा सारंगी वादन में नवोन्मेष के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत के वैश्विक प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने विश्व के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी है तथा विभिन्न सांस्कृतिक समन्वयों के माध्यम से इस वाद्य की पहुँच को व्यापक बनाया है। स्पिक मैके के अंतर्गत आयोजित इन सत्रों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत की समृद्ध शास्त्रीय सांगीतिक परंपरा से परिचित कराना तथा पारंपरिक कला रूपों के प्रति उनकी समझ और सराहना को प्रोत्साहित करना रहा।

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